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अंग्रेज़ी में एक कहावत है कि ‘Economy governs the relationship’ यानी संबंधों की बुनियाद पैसे पर टिकी होती है। रिश्तों में पैसा इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि इसकी ज़रा सी भी कमी सालों पुराने संबंधों पर पानी फेर सकती है। दरअसल, हम अपने जीवन को ज़्यादा से ज़्यादा आरामदेह और विलासिता से भरपूर करने की कोशिश में अपनी ज़रुरतें इतनी बढ़ा लेते हैं कि उन्हें पूरा करना मुश्किल हो जाता है और यहीं से लाइफ़ पार्टनर्स के बीच कहा-सुनी शुरु हो जाती है। ये बात सही है कि ज़िंदगी में प्रेम और पैसा दोनों ज़रुरी है लेकिन ये भी उतना ही सही है कि दुनिया में प्रेम संबंध टूटने की तीसरी बड़ी वजह पैसा ही है। ये बात अमेरिका के इंस्टीट्यूट फ़ॉर डिवोर्स फ़िनैंशियल ऐनलिस्ट्स के शोध में पता चली है।
पैसा महत्वपूर्ण है लेकिन सच ये भी है कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता। आप हर चीज़ पैसे से नहीं ख़रीद सकते। आप पैसे से ऐश-ओ-आराम की चीज़ें खरीद सकते हैं लेकिन दिल का सुकून नहीं ख़रीद सकते। हम यहां बताने जा रहे हैं कि कैसे आप पैसों के अभाव में भी अपनी ज़िंदगी को ख़ुशहाल बना सकते हैं और रिश्तों को टूटने से बचा सकते हैं।
अगर लोग इस मामले में एक दूसरे से खुलकर बात करने लगें तो बात को बिगड़ने से बचाया जा सकता है।
घर का मासिक बजट प्लान करने में पार्टनर की मदद करें
अक़्सर देखा गया है, ख़ासकर भारतीय समाज में कि घर चलाने की सारी ज़िम्मेदारी महिला पर छोड़ दी जाती है। ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि घर की अन्य ज़िम्मेदारियों की वजह खर्च बजट से आगे निकल जाता है और जब पति से वे अतिरिक्त पैसे की मांग करती हैं तो पति भड़क जाते हैं। बेहतर होगा कि आप अतिरिक्त ख़र्चे के बारे में पति से बात करें और पति को भी चाहिए कि वह इस एकाएक पड़ने वाले बोझ को समझे और उसी के अनुसार प्लान करने में पत्नी की मदद करे। इससे होगा ये कि आपका पार्टनर अचानक ख़र्चे को सुनकर नाराज़ नहीं होगा।
चादर जितनी पैर पसारें
एक कहावत है कि उतना ही पैर पसारिए जितनी चादर हो यानी अपनी आमदनी के अनुसार ही ख़र्च करें। अपने पार्टनर के साथ मिलकर पहले से ही महीने का बजट बना लें और उसी के अनुसार ख़र्च करें।
पड़ोसी के जीवनशैली की नक़ल न करें
अक़्सर देखा गया है कि लोग अपने पड़ोसियों से रहन-सहन के मामले में मुक़ाबला करने लगते हैं। अगर पड़ोसी ने महंगी कार ले ली तो आप भी नयी कार लेने के बारे में सोचने लगते हैं और कर्ज़ लेकर ले भी लेते हैं। लेकिन जब आपकी कमाई से ईएमआई कटने लगती है तो आपका सारा बजट गड़बड़ा जाता है और फिर शुरु हो जाती है दोनों के बीच नोंकझोंक। इसी तरह अगर पड़ोसी सैर सपाटे के लिए किसी हिल स्टेशन पर गया है तो आप भी उसकी देखा-देखी टूर प्लान करने लगते हैं भले ही आपका बजट इसकी इजाज़त दे या न दे।
Author- Anida Saifi
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