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नवरात्रि का पावन समय चल रहा है। आज माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप चन्द्रघंटा की आराधना का दिन है। माता रानी के जो भी भक्त पूरी नवरात्रि का व्रत या उपवास रखते हैं वो आज भी उपवास में होंगे। दिलचस्प है कि माता का नौ दिनों तक उपवास रहने वाले उनके भक्त पैरों में कुछ भी नहीं पहनते हैं। जी हाँ, वह नौ के नौ दिन बिना किसी फुटवियर के ही रहते हैं। भक्तों की मानें तो उन्हें इस तरह से रहकर उपवास करने में कोई भी दिक्कत नहीं होती है, उल्टे उनका आत्मविश्वास और आस्था और भी प्रबल हो जाती है। आइए जानते हैं कि आख़िर भक्तों का उपवास में नंगे पैर ही रहना क्यों ज़रूरी है और इसके पीछे का लॉज़िक क्या है।
उपवास में थकान नहीं लगती हैः
नौ दिनों तक नंगे पैर रहने से पैरों को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है। इससे रक्त संचार बेतहर होता है, जि‍ससे उनकी थकान या दर्द खत्म हो जाता है।
मांसपेशियाँ बने एक्टिवः
नंगे पैर पैदल चलने से वे सारी मांसपेशियां सक्रिय हो जाती है, जिनका उपयोग जूते-चप्पल पहनने के दौरान नहीं होता। मतलब आपके पैरों के अलावा, उससे जुड़े सभी शारीरिक भाग सक्रिय हो जाते हैं।
बीमारियों से निजातः
नंगे पैर पैदल चलते वक्त आपके पंजों का निचला भाग सीधे धरती के संपर्क में आता है, जिससे एक्युप्रेशर के जरिए सभी भागों की एक्सरसाईज होती है, और कई तरह की बीमारियों से निजात मिलती है।
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