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अगस्त का पहला संडे यानी फ्रेंडशिप डे, जब दुनिया मनाती है दोस्ती का त्योहार। वैसे तो ये चलन पश्चिमी देशों से भारत में आया है, लेकिन अब इंडिया में भी युवा इसे पूरे जोश के साथ मनाने लगे हैं और जब बात इंडिया की हो तो फिल्मों का जिक्र ना आए, ये हो नहीं सकता । क्योंकि यहां कि फिल्में इसांनी के हर जज्बात को बाखूबी बयां करती हैं... और दोस्ती पर बॉलीवुड फिल्मों ने ऐसी कई दास्तां पेश की है जो लोगों के लिए मिसाल बन चुकी है। आज फ्रेंडशिप डे के मौके पर हम कुछ ऐसी फिल्मों की बात करेंगे जो कि दोस्ती के ताने-बाने पर बुनी गई हैं और सफल भी साबित हुईं।
दोस्ती
साल 1964 में आई फिल्म 'दोस्ती' ने मित्रता का जो रूप दिखाया उसे आज भी लोग मिसाल के तौर पर याद करते हैं, इस फिल्म में एक अपाहिज और एक अन्धे लड़के के बीच दोस्ती को अटूट दोस्ती के रिश्ते का दिखाया गया है। फिल्म की सफलता का आलम आप इस बात से लगा सकते हैं कि उस समय में इस फिल्म को फिल्मफेयर अवार्ड में छ: पुरस्कारों से नवाजा गया, जिसमें सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार भी शामिल था। इस फिल्म के गाने में भी दोस्ती के जज्बात को नया आयाम दिया था। यहां सुनिए इस फिल्म का बेहतरीन गीत...
शोले
जी हां, दोस्ती का नाम आए और फिल्म 'शोले' का जिक्र कैसे ना हो, 1975 की ब्लॉकबस्टर फिल्म शोले में प्यार और नफरत के बीच दोस्ती के रिश्ते को भी बाखूबी दर्शाया गया है। फिल्म का गाना... ये दोस्ती आज भी लोगों के जुबान पर रहती है। लीजिए आप भी सुनिए ये सदाबहार गीत।
दिल चाहता है
साल 2001 में आई फिल्म दिल चाहता है में फरहान अख्तर ने नये जमाने के दोस्तों की कहानी पेश की थी, जिसमें तीन दोस्तों के सपनों के साथ उनके आंतरिक टकरावों पर भी फोकस किया गया था। है। फिल्‍म में इन तीन दोस्तों की भूमिका आमिर खान, सैफ अली खान और अक्षय खन्ना ने निभाई थी। इस फिल्म का सॉंग, हम ना रहे कभी यारों के बिन... युवाओं को काफी पसंद है।
थ्री इडियट्स
साल 2008 में आई फिल्म थ्री इडियट्स दोस्ती के साथ ही युवाओं के सपनों पर आधारित उम्‍दा कहानी ‌थी। इंजीनियरिंग कॉलेज के तीन दोस्तों के जरिए राजकुमार हिरानी ने अभिभावको के साथ युवाओं के द्वंद को दिखाया था। इस फिल्म का सॉंग, बहती हवाओं सा था वो... आपको आपके अजीज दोस्त की याद जरूर दिला देता है।
जिंदगी न मिलेगी दोबारा
फिल्म जिंदगी मिलेगी न दोबारा में तीन दोस्तों के सफर के जरिए आज के युवाओं के अंर्तद्वंद को दिखाया गया है, कैसे आज के युवा जिंदगी की भागदौड़ मे असल जीना भूल जाते हैं। फिल्म का सॉग, दिल धड़कने दो ... भी अपने आप में बेहद खास है, जो आपको अपने अजीज दोस्तों के साथ कुछ पल बिताने की राह दे देता है।
Author: Yashodhara Virodai
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