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अक्सर देखा जाता है जब भी लोग भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं या फिर आरती करते समय तालियां जरूर बजाते हैं, तो इसके पीछे कुछ ना कुछ रहस्य जरुर छुपा रहता है। अगर आप इस रहस्य से अनजान हैं, तो चलिए हम बताते हैं इस रहस्य के बारे में।
हिंदू धर्म में आरती के दौरान ताली बजाने एक स्वाभाविक क्रिया मानी जाती है। जहां भी आरती संपन्न होती है, वहां श्रद्धालु ताली बजाते हैं। सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार केवल आरती के मध्य ही करतल ध्वनि उत्पन्न करना चाहिए। ताकि कर्ण प्रिय ध्वनि उत्पन्न हो तथा आरती के साथ उसका बेहतर संयोजन हो सके।
यूं तो यह माना जाता है, कि तालियां बजाना एक व्यायाम है। इससे हमारे पूरे शरीर में खिंचाव होता है, जिसके कारण शरीर की मांस पेशियां सक्रिय हो जाती हैं। जब भी हम जोर-जोर से तालियां बजाते हैं, तो कुछ ही देर बाद हमारे शरीर से पसीना आना शुरू हो जाता है। जिसके कारण शरीर में उत्तेजना पैदा होती है, जो हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद है। हमारी हथेलियों में शरीर के अन्य अंगों की नसों के बिंदु होते हैं, जिन्हें एक्यूप्रेशर पॉइंट कहते हैं। यह क्रिया करने से शरीर के संबंधित अंगों में रक्त संचार बढ़ता है, जिससे शरीर बेहतर तरीके से कार्य करता है। ताली बजाना हमारे शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक होता है।हिंदू धर्म में किसी भी प्रकार की धार्मिक कार्यों में तालियां बजाना शुभ माना जाता है, जिसके कारण हिंदू धर्म में अक्सर देखा जाता है, धार्मिक कार्यों में तालियां अवश्य बजाएं जाते हैं।
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