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वैसे इस सवाल का जवाब ढूंढ़ना इतना आसान भी नही है क्योंकि जीवन साथी चुनना मनुष्य पर ही निर्भर करता है और मनुष्य के निजी विचार दोनो ही पक्ष मे लगभग एक समान ही मिलते है। बहुत सारे लोग जीवन साथी नही रखने पर सहमत होते है तो कुछ लोग जीवन साथी को बेटर हाफ समझते है।
शादी जीवन का अहम हिस्सा माना जाता है। कहा जाता है कि शादी हमारी जिंदगी मे एक ठहराव लाती है क्योंकि हमारे सोचने समझने को ताकत देने का काम भी करती है शादी। किसी को जीवन साथी चुनने का मतलब है दो आत्माओ, शरीरो,भावनाओं का मिलना और साथ में जीवन बिताना।
हम सब का जीवन एक ऐसी राह पर चल रहा होता है जहाँ हम चाह कर भी अकेले नही चल सकते क्योंकि हमे हर एक हालात मे एक साथी की ज़रूरत होती है। बचपन मे माँ का साथ बहुत ज़रूरी होता है तो लड़कपन मे दोस्तो का साथ और नौजवान होने पर एक जीवन साथी का जो हमारा साथ आखरी सांस तक निभाता है। यानी हमारे सु:ख दुःख का साथी बनता है। हम सब का जीवन उतार चढ़ाव से भरा होता है। जहाँ हमे हमेशा एक अच्छे और हमें समझने वाले साथी की ज़रूरत होती है। जिस तरह हमे दुःख मे किसी अपने खास का कन्धा चाहिए होता है वैसे ही छोटे बड़े सु:ख में खुशी बाटने वाला साथी की भी जरूरत होती है।
जीवन साथी एक दूसरे पर निर्भर भी होते है और भरोसा भी करते है ।पैसे कमाने की चिंता मर्द निभाता है तो घर चलाने की जिम्मेदारी औरत बखूबी निभाती है।मर्द जब थका हारा घर आता है तो अपने जीवन साथी को देख कर तरोताज़ा हो जाता है और उसकी सारी थकान औरत का प्यार और स्नेह उतार देता है। वही जब औरत को अपने किसी कमज़ोर लम्हो मे एक मज़बूत ढाल की ज़रूरत होती है तब वह ढाल उसका जीवन साथी ही बनता है।
जीवन को अच्छे और सभ्य रूप मे चलाने के लिये एक साथी की खास ज़रूरत होती है। अब चाहे पैसा,बाजार और ताक़त का प्रदर्शन हो या घरबार,लालन पालन हमे एक जीवन साथी की ज़रूरत ज़रूर होती है।ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop एप, वो भी फ़्री में और कमाएं ढेरों कैश वो भी आसानी से
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