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हर साल 12 शिवरात्रि आती है। जिसमें महाशिवरात्रि सबसे ज्यादा खास होती है। माना जाता है कि इसमें व्रत रखने से हर पाप का नाश होता है। साथ ही भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। शास्त्रों के अनुसार सावन शिवरात्रि का बहुत अधिक महत्व होता है। इस दिन व्रत रखने से हर पाप का नाश होता है। साथ ही मनचाहे वर और वधु की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान शिव की कृपा आपके और आपके परिवार के ऊपर हमेशा बनी रहती है। वहीँ सावनी सोमवारी के दिन पूजा व्रत का भी विशेष महत्व है। सावन में ऐसी मान्यता है कि सोमवार के दिन हर किसी को व्रत रखना चाहिए व्रत रखते वक्त मूल बातों का ध्यान में रखना जरूरी है इस दिन केवल फलाहार का सेवन करें और मन को शुद्ध रखें।
सावन के शिवरात्रि में पूजा के लिए शुभ मुहूर्त निशीथ काल: में होता है जिसका समय रात 12:05 मिनट से 12:48 मिनट तक है। वहीं, इस दिन शिवमुट्ठी के लिए कच्चे चावल, सफेद तिल, खड़ा मूंग, जौ, सतुआ का प्रयोग करें। इसके साथ ही पंचामृत के लिए दूध, दही, चीनी, चावल, गंगाजल मिलाएं। इसके अलावे बिल्वत्र, फल, फूल, धूप बत्ती या अगरबत्ती, चंदन, शहद, घी, इत्र, केसर, धतूरा, कलावे की माला, रुद्राक्ष, भस्म, त्रिपुण्ड्र रखें
घर पर या मंदिर में शिव जी की पूजा करें और शिव जी के साथ माता पार्वती और नंदी गाय को पंचामृत जल अर्पित करें। ऐसा करने के बाद शिवलिंग पर ऊपर बताई हुई सामाग्रियों को एक एक कर के शिव मंत्र ऊँ नम: शिवाय के जाप के साथ चढ़ाते जाएं भगवान की पूजा दिल से करें। इससे आप उन्हें जो कुछ भी अर्पित करेंगे उससे आपकी पूजा सफल मानी जाएगी।
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