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देश आज़ादी के जश्न में डूबने को बेताब है और हो भी क्यों ना।गुलामी की जंजीरो से आज़ादी की ये सालगिराह भी तो है। 15 अगस्त को देश को आज़ादी मिली यानी देश में नया सवेरा हुआ।अब जब आज़ादी का जश्न है तो हर जगह अपना तिरंगा झंडा भी होना चाहिए और होता भी है।हर सरकारी दफ्तर, निजी दफ्तर, आफिस ,कंपनी, शोरूम सब जगह आपको इस ख़ास दिन तिरंगा झंडा दिखता ही है।
बाजार में सबसे ज़्यादा झंडा प्लास्टिक का होता है जो छोटा भी होता है और आसानी से लगाया भी जा सकता है। लेकिन इस बार वो झंडा बाजार में गैर कानूनी हो गया है। ये खुद इस बार सरकार ने किया है क्योंकि ये प्लास्टिक से बना होता है और प्रकृति के लिए इनमें लगाए गए रंग और प्लास्टिके दोनों ही ख़तरनाक होते है।
इसके साथ ही इस बार सरकार ने स्वतंत्रता दिवस से पहले सभी देश वासियों से प्लास्टिक के बने हुए राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह भी जारी की है। सरकार ने राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों से ध्वज संहिता जारी कर इसपर सख्ती से पालन करने का फरमान जारी किया है।
एडवाइजरी रिपोर्ट में होम मिनिस्ट्री ने कहा है कि उसके संज्ञान में आया है कि महत्वपूर्ण समारोहों में प्लास्टिक के बने राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल किया जाता है, इस तरह के झंडे प्राकृतिक तरीके से नष्ट नहीं होते हैं और इसलिए इनका प्रयोग नहीं करें।
एडवाइजरी में ग्रह मंत्रालय ने आगे कहा गया है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय,सांस्कृतिक और खेल कार्यक्रमों के आयोजनों पर "भारत की ध्वज संहिता” 2002 के प्रावधानों के अनुसार आम जनता को केवल कागज के बने झंडों का इस्तेमाल करना चाहिए और इस तरह के कागज के झंडों को जमीन पर कभी नहीं फेका जाना चाहिए!ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop एप, वो भी फ़्री में और कमाएं ढेरों कैश वो भी आसानी से
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