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बात आती है पैरेंटिंग की तो भारत इसमें काफी पीछे खड़ा नज़र आता है। लेकिन इसी के मुकाबले अमेरिका नय तरीके की पैरेंटिंग की बात करता है। ये कहने को एक डिबेट का मुद्दा है। भारत में जहां पर माता-पिता अपने बच्चों की परवरिश में पूरी तरह इंवॉल्व होते हैं वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में पैरेंट्स छोटी उम्र में ही बच्चों को अपने कमरे से अलग कर देते हैं।
ऐक्पर्टस की माने तो भारतीये माता-पिता काफी ट्रिकी पैरेंटिंग करते हैं , जो बच्चों पर गलत असर डालती है। तो जानिए भारत और अमेरिका की पैरेंटिंग में अंतर।
- बात भारत की करें तो जब कोई नये शादिशुदा जोड़े के घर खुशखबरी आने वाली होती है तो आसपास के लोग अपने अपने हिसाब से आपको एडवाइस देते हैं और एडवाइस की एक वीडियो स्ट्रीम करके दिखा देते हैं।
- वहीं बात करें अगर अमेरिका की तो ऐसे में लोग पैरेंटिंग क्लास लेते हैं और साथ ही बच्चे के जन्म के समय पती लेबर रूम में मौजूद होते हैं। अमूमन भारत में ऐसा देखने नहीं मिलता है।
- जहां पर भरत में एक प्रथा है और साथ ही यहां के पाता-पिता ये समझते हैं की बच्चे जब तक बड़े नहीं हो जाते हैं उनके कपड़े पहनने से लेकर हर एक छोटा काम करते है साथ ही लाइफ के फेसले भी खुद ही लेते हैं।
- अमेरिका में इसके विपरीत होता है। यहां पर लोग अपने बच्चों को बचपन से ही अकेला छोड़ देते हैं। यहां तक की वह बचपन से उनहे खाना भी नहीं खिलाते हैं। खाना भी खुद ही खाते हैं। उनके पास शुरू से ही अपना कमरा होता है साथ ही जब वह 18 साल के हो जाते हैं तभी उनको घर से बहार कर देते हैं और इस उम्र में वह अपने पैरों पर खड़े हो जाते हैं।
Author- Anida Saifi
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