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ऋषभ पंत के अब तक के करियर से यह साफ है कि वे सीमित ओवरों के लिए एक आदर्श विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं लेकिन टेस्ट के मामले में यही बात नहीं कही जा सकती । इंग्लैंड दौरे के आखिरी टेस्ट की आखिरी पारी में पंत ने अपनी बल्लेबाजी से दिखा दिया है कि वे टेस्ट में एक विशुद्ध बल्लेबाज के रूप में भी खेलने की क्षमता रखते हैं। चपलता, फुर्ती और रिफ्लेक्स किस कदर विकेटकीपिंग में काम आते हैं यह पंत के प्रदर्शन से साफ दिखा। तीन टेस्ट में कुल 76 और आखिरी दो टेस्ट में कुल 70 रन बाईज के रूप में देने के बाद पंत की विकेटकीपिंग पर उठे सवाल इस कदर मुखर हो चले हैं कि अगर पंत ने अपनी विकेटकीपिंग में कोई चमत्कारिक बदलाव नहीं किए तो आगामी दौरों में पंत को टेस्ट की विकेटकीपिंग मिलनी मुश्किल है।
ऋषभ ने नॉटिंघम में अपना पहला टेस्ट खेलते हुए प्रथम टेस्ट की पहली पारी में चार और दूसरी में दो यानी कुल मिलाकर केवल 6 रन बाई के दिए जिसे सामान्य ही कहा जाएगा लेकिन इसके बाद साउथैंप्टन में हुए अगले ही टेस्ट में उनकी विकेटकीपिंग का स्तर इतना गिरा कि हर कोई हक्का-बक्का रह गया। यहां इंग्लैंड के पहली पारी में बने 246 रन में उन्होंने कुल 23 रन बाई के दिए तो दूसरी पारी में सात यानी कुल 30 रनों का महती योगदान दिया। ओवल में पहले दिन शानदार शुरूआत के बाद इंग्लैंड का स्कोर खेल खत्म होते समय 7 विकेट 198 रन थे जिसमें से पंत का बाईज के योगदान था 18 रनों का जो 332 तक पारी समाप्त होने तक 26 रन तक पहुंच गया और इस टेस्ट में पंत ने कुल 40 रन गिफ्ट के रूप में मेजबान को दिए।
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