Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
हाल ही में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक बयान दिया है जो आज कल सुर्खियों में है। ये बयान आम और खास हर तरह के लोगो से सीधा जुड़ा हुआ है। मामूम हो कि सुप्रीम कोर्ट का ताज़ा ब्यान भारत के पति, पत्नि और ‘उसके’ संदर्भ में है। आपको बता दें कि व्यभिचार की धारा 497 पर फैसला दिया है। इससे पहले पीठ के सामने मसला उठा था कि आइपीसी की धारा 497 आसंवैधानिक है या नहीं, क्योंकि इसमें सिर्फ पुरुषों को आरोपी बनाया जाता है, महिलाओं को नहीं। हालाँकि इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने स्पष्ट और नई वयाख्या करते हुए कहा कि, महिला का मास्टर नहीं होता है पति।
पढ़िये सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला।
- 157 साल पुराने व्यभिचार कानून को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं
- सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार कानून को बताया असंवैधानिक , कहा-चीन, जापान, ब्राजील में ये अपराध नहीं
- चीफ जस्टिस ने कहा-व्यभिचार कानून महिला के जीने के अधिकार पर असर डालता है।
- चीफ जस्टिस ने कहा-इसमें कोई संदेह नहीं कि व्यभिचार तलाक का आधार हो सकता है, मगर यह अपराध नहीं हो सकता।
- CJI बोले- भारतीय संविधान की खूबसूरती ये है कि ये I, me and U को शामिल करता है।
- प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने 157 साल पुराने व्यभिचार कानून को बताया मनमना
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा-जो भी सिस्टम महिला की गरिमा से विपरीत या भेदभाव करता है वो संविधान के wrath को आमंत्रित करता है। जो प्रावधान महिला के साथ गैरसमानता का बर्ताव करता है वो अंसवैंधानिक है।
- पांच में से दो जज व्यभिचार कानून को रद्द करने को लेकर हुए एकमत। बहुमत से दिया फैसला।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा-यह पूर्णता निजता का मामला है, महिला को समाज की चाहत के हिसाब से सोचने को नहीं कहा जा सकता।
Author- Anida Saifi
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop app, वो भी फ़्री में और कमाएं ढेरों कैश वो भी आसानी से...
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.